Yaad Shayari, or poetry of remembrance, holds a special place in the world of emotions and literature. It beautifully captures the feeling of missing someone who is no longer present, whether due to distance, separation, or time. Through simple yet powerful words, Yaad Shayari expresses memories that refuse to fade. These verses often arise from love, loss, and deep attachment, making them relatable to anyone who has ever held someone close in their heart. The charm of Yaad Shayari lies in its ability to turn silent memories into meaningful expressions.
In Yaad Shayari, memories become alive through emotions. Poets use soft language, metaphors, and heartfelt lines to describe sleepless nights, sudden thoughts, and the pain of absence. A single line can carry years of emotions and untold stories. This form of poetry allows people to release their hidden feelings, offering comfort and understanding. Reading Yaad Shayari often feels like listening to one’s own heart, as it reflects personal experiences of longing and remembrance.
Overall, Yaad Shayari is more than just poetry; it is an emotional connection between the past and the present. It reminds us that memories never truly leave us, no matter how much time passes. Through words filled with pain and love, Yaad Shayari keeps relationships alive in the heart, proving that true emotions are eternal and unforgettable. Yaad Shayari in Hindi | Teri Yaad Shayari in Hindi | Yaad Shayari on Life | Yaad Shayari For Girls | Yaad Shayari For Boys
Yaad Shayari

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

किसी बहाने से दिल में आते तो सही
इन धडकनों को फिर सुलझाते तो सही
तुम्हारे याद की महफ़िल फिर से सजी है
फिर से रंग जमता तुम आते तो सही ।।

इस दिल की हालत तुझको सुनाऊंगा
तेरे आईने में बस मै ही नजर आऊंगा
यादों की बारात फिर सजने लगी है
दिल में शहनाईया सी बजने लगी हैं ।

न जाने दिल आज क्यूं भरने लगा है
किसी की चाहत में फिर उतरने लगा है
डूब जाने का डर फिर सता रहा है
दिल किसी को फिर याद करने लगा है।।

तुमसे दूर रहकर दिल को आराम नहीं है
इक चाहत के सिवा कोई काम नहीं है
हर घड़ी मुझको तेरी याद सताती है
तेरे संग जो गुजरे वो सुबह शाम नहीं है ।।

छा रही है खुमारी तेरे प्यार की
घडी कटती नहीं है इन्तजार की
कबसे भौंरे तलाशते गुलों में खुशबू
मस्ती भर गयी गई फिर बहार की ।।

दिल फिर तुझसे मुलाकात चाहता है
अक्सर तन्हाई में तेरा साथ चाहता है
तुझसे सुरु हुई हैं ख़्वाबों की कहानी
जो ख्वाबों से भर गई है वो रात चाहता है।।

शम्मा जल-जल के बुझ रही परवाने के लिए
वो खुद को मिटा रही है दीवाने के लिए
चाहत में उसके डूब कर याद कर रही है
हसीन लम्हों को वो आबाद कर रही है ।।

जिसके आने की खुशी हर पल रहे
इस दिल में उसकी यादों का महल रहे
खुली आखों से दीदार हो जाए उनका
चाहत की महफ़िल सजे कोई गजल कहे ।।

एक दर्द सा उठा दिल में
पलकों में आँसू आ गए हैं
गुजरे हुए लम्हों की कसम
उसकी याद बादल फिर छ गए ।

मुझे इश्क की जंजीर से कब आजाद करोगे
मेरी चाहत अपने दिल में कब आबाद करोगे
तेरे ही चर्चे हर दम मेरी महफ़िल में हैं
अय जाने दिल तुम मुझे कब याद करोगे ।।

इस दिल का हाल तुमको सुनना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ फिर शाम कोई बिताना चाहता हूँ
आज अपने ख्वाबों में मुझको याद करलो
दिल की चाहत है तुमको याद आना चाहता हूँ।।

शाम तेरी याद की ख्वाबों की रात है
कहना तुमसे फिर जो दिल की बात है
आना कभी जो तुम ठहरो एक दो दिन
पूरी नहीं होती है, जो है मुलाक़ात है।।

उस रात की कहानी अधूरी रह गयी है
सुनाना है तुमको फिर हाले-ए दिल हमारा
एक तुम नहीं आये थे तेरी याद आई थी
हम कैसे भुला दें उस शाम का नजारा ।।

ख्याल तेरा दिल से मिटाया नहीं जाता
भूले से कभी तुझको भुलाया नहीं जाता
ये इश्क है या कोई खुमार है छा गया है
इक तेरी याद आई कोई दर्द आ गया है ।।

जब भी आइने को निहार के देखता हूँ
खुद के साथ तुझको हर बार देखता हूँ
ये इश्क नहीं तो फिर और क्या है
मेरे ख़्वाबों में बस तेरा ही चेहरा है ।।

उसके यादों के सितारे में चमक आ गयी
फिर मोहब्बत के बहारों में चमक आ गयी
मेरे दिल के आँगन में कोई तो गुल खिला है
उसके आने से गुलों में फिर महक आ गयी ।

इस जमी से फलक तक तेरा साथ चाहता हूँ
जिन्दगी के सफ़र है हाथों में हाथ चाहता हूँ
तुम मुस्कुरा के मेरे दिल के महल में आ जाओ
जो तेरे संग गुजरे बस वही रात चाहता हूं।।

तन्हा ही था पर तेरी याद साथ थी
उन घडी लम्हों की बारात साथ थी
बस कमी थी तो तेरे हसीन बाहों की
एक ख्वाब था और सूनी सी रात थी।।

काश मेरी आह में कुछ तो असर हो जाता
मेरी तड़प का उसको भी खबर हो जाता
उसके ख्वाब मुझको रातों भर जगाते
तारें गिन-गिन कर शाम से सहर हो जाता।।

जब वो गए हैं हमसे मुलाकात करके
दिल की सूनी धडकनों में जज्बात भरके
गमसुम हो गया हूँ कुछ होश नहीं है
दिन रात कट रहे हैं बस तुझे याद करके।।

उसके बिन अब तो जीना मुहाल हो रहा है
उसकी याद में मेरा बुरा हाल हो रहा है
अब तो उसके ख्वाबों का ही सहारा है
उसकी दिन -रातों पर बस हक हमारा है ।।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।

दिल न जाने क्यों तुमको याद कर रहा है
फिर से चाहत की फ़रियाद कर रहा है
जख्म अबतक नहीं भरे हैं किसी बहाने से
हालत तो पूंछो आकर अपने दीवाने से ।